Jana Gana Mana | Ravindra himself sang the song.

Janganamana has many distinctive features. It is noteworthy that the words used in it are known to people of all languages ​​across the country. Because of this, he got everyone’s approval and favor. This song was first sung in Calcutta on December 27, 1911 during the annual session of the Indian National Congress. It was published in Tatvabodhini magazine in 1912 under the title Bharata Vidhata.Outside Calcutta, Rabindranath Tagore himself sang “Janaganamana” on February 28, 1919 at the Besant Theosophical College in Madanapalle, Chittoor District.

The Constituent Assembly met for the first time as a sovereign body at midnight on August 14, 1947, when the country gained independence. The meeting ended with the chanting of “Janaganamana”. “Janaganamana” was officially adopted as the national anthem of India on January 24, 1950 by the Constituent Assemblyseconds to sing the full national anthem, it takes 20 seconds to sing an abridged version.

The national anthem is a source of pride for the people of the country. The code of conduct for the national anthem is enshrined in the Respect for Ethnicity Act 1971. The national anthem is the most important symbol of a country strongly declaring its independence and sovereignty. Although people of different languages ​​live in India, Janagamana is easy for everyone to understand.

The national anthem introduces the traditions and values ​​that form the backbone of the country. It reflects the diversity of India. Not only Janganamana, but also the national anthem of neighboring Bangladesh “Amar Sonar Bangla” was written by Tagore. In addition, Rabindra’s seal can be seen in the script of the Sri Lankan national anthem.

जंगमना में कई विशेषताएं हैं। उल्लेखनीय है कि इसमें प्रयुक्त शब्द देश भर में सभी भाषाओं के लोगों को भली-भांति ज्ञात हैं। इसलिए इसे सभी का अनुमोदन और आशीर्वाद मिला। यह गीत पहली बार कलकत्ता में 27 दिसम्बर 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशन के दौरान गाया गया था। यह तत्वबोधिनी पत्रिका में 1912 में ‘भारत विधाता’ शीर्षक से प्रकाशित हुआ था। कलकत्ता के बाहर, ‘जनगणना’ को रवींद्रनाथ टैगोर ने 28 फरवरी, 1919 को मदनपल्ले, चित्तूर जिले के बेसेंट थियोसोफिकल कॉलेज में खुद गाया था।

संविधान सभा की पहली बार एक संप्रभु निकाय के रूप में 14 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को बैठक हुई, जब देश को स्वतंत्रता मिली। सभा का समापन ‘जनागनामन’ के गायन के साथ हुआ। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा द्वारा ‘जनगणनामन’ को आधिकारिक तौर पर भारत के राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया था।

राष्ट्रगान को पूर्ण रूप से गाने में जहां 52 सेकेंड का समय लगता है, वहीं छोटे संस्करण को गाने में 20 सेकेंड का समय लगता है। राष्ट्रगान देश की जनता के लिए गौरव का विषय है। राष्ट्रगान के लिए आचार संहिता जातीयता अधिनियम, 1971 के सम्मान में निहित थी। राष्ट्रगान उस देश का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक है जो अपनी स्वतंत्रता और संप्रभुता की दृढ़ता से घोषणा करता है। हालांकि भारत में अलग-अलग भाषाओं के लोग रहते हैं, लेकिन जनगमन को सभी आसानी से समझ सकते हैं। राष्ट्रगान उन परंपराओं और मूल्यों को प्रस्तुत करता है जो देश की रीढ़ हैं। भारत की विविधता को दर्शाता है। न केवल जंगमना बल्कि पड़ोसी बांग्लादेश का राष्ट्रगान ‘अमर सोनार बांग्ला’ टैगोर द्वारा लिखा गया था। इसके अलावा, श्रीलंका के राष्ट्रगान के लेखन में रवींद्र की मुहर देखी जा सकती है।

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